छायावादी युग (1920-1935)
डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार- “जब परमात्मा की छाया आत्मा पर पड़ने लगती है और आत्मा की छाया परमात्मा में, तब वही छायावाद है या आत्मा और परमात्मा का गुप्त वाग्विलाश ही रहस्यवाद है और यही छायावाद है l”
डॉ. नगेन्द्र के अनुसार- “स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह ही छायावाद कहलाता है l”
आचार्य नन्दुलारे बाजपेयी के अनुसार- “मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्मस, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भाव छायावाद है l”
छायावाद के प्रमुख कवि एवम् उनके रचनाएँ :-
कवि रचनाएँ
1. श्री जयशंकर प्रसाद - कामायनी, आँसू, झरना, लहर
2. सुमित्रानंदन पंत - विणा, पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, लोकायतन
3. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला - परिमल, अनामिका गीतिका,नए पत्ते,
4. महादेवी वर्मा - नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा
5. रामधारीसिंह दिनकर - रेणुका, हुंकार, रसवंती
छायावाद की विशेषताएँ :-
· स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह :- द्दीवेदी युगिन् कविता में अत्यधिक स्थूलता उपदेशात्मकता तथा इतिवृत्तात्मकता के रूप में आ गई थी l
· व्यक्तिवाद की प्रधानता :- छायावादी कविता मूलतः व्यक्तिवाद की कविता है जिसमे व्यक्ति की निजी अभिव्यक्ति है l
· प्रकृति प्रेम :- छायावादी कविता में प्रकृति प्रेम की अभिव्यक्ति हुई है l
· प्रेम और सौन्दर्य का चित्रण :- छायावादी कवियों ने नारी सौन्दर्य तथा प्रेम का चित्रण किया है l
· रहस्यवादिता :- छायावादी कविता में आध्यात्मिकता का चित्रण है यह आध्यात्मिकता ही रहस्यवादिता है l
रहस्यवाद
रहस्यवाद का अर्थ है छिपी हुई बात l अतः रहस्यवाद का अर्थ हुआ वह वाद जिसका मूलाधार छिपा हुआ है l
आचार्य रामचंद्र शूक्ल के अनुसार =”साधना के क्षेत्र में जो अद्वैतवाद है वही साहित्य के क्षेत्र में रहस्यवाद है l”
महादेवी वर्मा के अनुसार –“अपनी सीमा को असीम तत्व में खो देना ही रहस्यवाद है l”
रहस्यवाद के प्रमुख कवि एवम् उनके रचनाएँ :-
कवि रचनाएँ
1. कबीरदास - कबीर ग्रंथावली, बीजक
2. महादेवी वर्मा - नीहार, नीरजा
3. जयशंकर प्रसाद - आँसू, लहर
4. डाँ. रामकुमार वर्मा - अंजली
रहस्यवाद की विशेषताएँ :-
· अलौकिक सत्ता के प्रति प्रेम :-इस युग में अलौकिक सत्ता ईश्वर के प्रति प्रेम जिज्ञासा और आकर्षण के भाव प्रकट हुए है l
· आत्मसमर्पण की भावना :- इसमें आत्मसमर्पण की भावना पैजती है l
· जिज्ञासा की भावना :- आत्मा की परमात्मा की विरहणी मानते हुए उससे मिलने तथा वियोग के भाव प्रकट किये जाते है l
· प्रतिको का प्रयोग :- रुपको और प्रतिको को अभिनव योजना पाठको के समक्ष प्रस्तुत की है l
प्रगतिवादी (1936-1943)
प्रगतिवाद के प्रमुख कवि एवम् उनके रचनाएँ :-
कवि रचनाएँ
1. रामधारी सिंह दिनकर - कुरुक्षेत्र, रेणुका
2. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला - कुकुर्मुता, बेला
3. सुमित्रानंदन पंत - गुंजन
4. नागार्जुन - भस्मासुर, युगधारा
5. मुक्तिबोध - चाँद का मुंह टेढ़ा है l
प्रगतिवाद की विशेषताएँ :-
1. शोसको के प्रति घृणा और शोषितों के प्रति करुणा :- पूंजीवादी व्यवस्था शोषण को जन्म देती है और सामाजिक विषमता को पैदा करती है l
2. यथार्थ का चित्रण :- प्रगति वादी साहित्य का ध्येय रहा है कि समाज में जो कुछ भी घटित होता है ,उनका साफ-साफ बखान करना इसका लक्ष्य होता है l
3. रुढ़िवादी का विरोध :- प्रगतिवादी कवि रुढ़िवादी के कट्टर विरोधी है ये हस्यावाद, परमात्मा, स्वर्ग, नर्क, के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते l
4. नारी मुक्ति का स्वर :- प्रगतिवादी रचनाओ में युग युग से शोषित, प्रताड़ित, वन्दनीय नारी को पुरुष समाज के सदृश प्रतिष्ठित करने का स्वर है l
प्रयोगवादी (1943-1950)
प्रयोगवादी के प्रमुख कवि एवम् उनके रचनाएँ :-
कवि रचनाएँ
1. मुक्तिबोध - चाँद का मुह टेढ़ा, भूरी-भूरी खाक धुल
2. नरेश मेहता - संशय की एक रत, बन पाखी
3. गिरजा कुमार माथुर - धुप के धान, शिला पंख चमकीले
4. धर्मवीर भारती - अंधायुग, कनुप्रिया
प्रयोगवादी की विशेषताएँ :-
1. नवीं उपमानो का प्रयोग :- इस वाद के कवियों का मानना था की पुराने उपमान उदासीन हो गए है अतः इसके स्थानों पर नवीं उपमानो का प्रयोग किया l
2. बुद्धिवाद की प्रधानता ;- बुद्धि तक को प्रधानता देने के कारण भाषा में दुरुहता का समावेश हो गया है l
3. निराशावाद की प्रधानत :- प्रयोगवादी कवियों ने मानव-मानव इ निराशा और हताश का यथार्थ चित्रण किया है l
4. रुढियो के प्रति विद्रोह :- प्रयोगवादी कवियों में रुढियो के प्रति स्वर मुकुरित हुआ l कवियों ने रूधि युक्त नवीन समाज की स्थपना पर बल दिया है l
नई कविता (1950-से अब तक)
जिन कविता में नये भावबोधो, आधुनिक, युगीन विचारो की अभिव्यंजन नवीन भाषा शिल्पों के माध्यम से की गई है, उसे नई कविता के नाम से जाना जाता है l
नई कविता के प्रमुख कवि एवम् उनके रचनाएँ :-
कवि रचनाएँ
1. दुष्यंत कुमार - सांय में धुप, एक कंठ विष पाई
2. नरेश मेहता - संशय की एक रत
3. धर्मवीर भारती - अँधा युग, कनुप्रिया
4. मुक्ति बोध - चाँद का मुँह टेढ़ा
नई कविता की विशेषताएँ :-
1. आधुनिकता की अभिव्यक्ति :- आधुनिकता नई कविता के केंद्र में प्रतिबिंबित है l
2. शिल्पगत नवीनता :- नई कविता के कवि नये प्रतीक व् नए उपमानो को ढूंढते है जैसे- मेरे सपने इस तरह टूट गये l
3. बौद्धिकता :- नई कविता छायावादी चित्रमोह से मुक्त होकर विभावी के बौधिक आलेख में बदल गई है l
4. काव्य भाषा :- नई कविता में नये भाव बोधो को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा के क्षेत्रो में नयापन लाने का प्रयास किया गया है l


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