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Student life and discipline, विद्दार्थी जीवन और अनुशासन, पर्यावरण प्रदुषण essay in hindi


-: विद्दार्थी जीवन और अनुशासन :-


रुपरेखा -

1. विद्दार्थी जीवन और अनुशासन का अर्थ :- 
2. प्राचीन काल का विद्दार्थी जीवन :-
3. वर्तमान युग का विद्दार्थी जीवन :-
4. अनुशासन की उपयोगिता एवं अनुशासन :-
5. अनुशासनाहिनता के करण :-
6. निष्कर्ष :-

विद्द्यार्थी जीवन और अनुशासन का अर्थ :- विद्दार्थी दो शब्दों से मिलकर बना है विद्दा + अर्थी l विद्दा का अर्थ ज्ञान है l अर्थी का तात्पर्य चाहने वाला या इच्छुक l अर्थात विद्दा का अध्ययन करने के इच्छुक ही विद्दार्थी है l अनुशासन भी अनुः उपसर्ग और शासन दो शब्दों से मिलकर बना है l अनु का अर्थ होता है विशेष या अधिक तथा शासन का अर्थ होता है नियम या सिधान्तो का पालन l नियमबद्ध जीवन व्यतीत करना ही अनुशासन है l  

प्राचीन काल का विद्द्यार्थी जीवन :- प्राचीन काल में विद्दार्थी गुरुकुल में रहते हुए त्याग, सेवा, विनय, सहानुभूति आदि गुणों को ग्रहण कर गृहस्त आश्रम के जीवन में प्रवेश करता था गुरुकुल में ही उसके जीवन की सुद्रण आधारशिला रख दी जाती थी l   

वर्तमान युग का विद्द्यार्थी जीवन :- आज पांच या छःवर्ष की अवस्था में बालक विद्दार्थी जीवन में प्रवेश करता है l प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक विद्दालय में सिक्षा प्राप्त कर वह महाविद्दालय में प्रवेश करता है l  प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक विद्दालय तक तो वह अनुशासित दिखाई पढ़ता है किन्तु म्हाविद्दली में प्रवेश करते ही अनुशासनहीनता की ओर अग्रसर दिखाई पढ़ते है l 

अनुशासन की उपयोगिता एवं अनुशासन :- किसी भी विद्दार्थी के लिए अनुशासन की आवश्यकता हमेशा पढ़ती है l अनुशासन का महत्व न केवल विद्दार्थी के लिए बल्कि समस्त जन के लिए उपयोगी व आवश्यक है l

1. अनुशासन किसी भी व्यक्ति को सभ्य नागरिक एवं चरित्रवान बनता है l
2. अनुशासन से विद्दार्थी आत्म निर्भर एवं आत्म विश्वासी बनता है l 
3. व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ मानसिक प्रगति अनुशासन से ही संभव है l 
4. अनुशासन या निश्चित व्यवस्था से धन और संयम की बचत होती है l 
5. मनोरंजन और अध्ययन दोनों के साथ-साथ चलने का बीड़ा अनुशासन ही लेता है l   

अनुशासनाहिनता के करण :- अनुशासनहीनता का मुख्य करण अनियंत्रण ही है चाहे वह किसी भी क्षेत्र द्वारा हो l चाहे वह माता-पिता के द्वारा हो या शिक्षक के द्वारा हो या शासन के द्वारा हो इनके कई कारण हो सकते है -

1. बड़ती हुई जनसंख्या इसका प्रमुख करण है l
2. माता-पिता के अपने संतान के प्रति ध्यान न देना l
3. शिक्षकों के द्वारा अनुशासन का महत्व न समझाया जाना l
4. महापुरुषों के चरित्र को पाठ्यक्रम में अधिक से अधिक स्थान न देना l
5. सामाजिक प्रतिष्ठा पाने की चाह का अभाव दिखाई पड़ना l
6. राजकीय अराजकीय नियंत्रण का प्रभाव l 

निष्कर्ष :- यदि परिवार और विद्दालय दोनों मिलकर अनुशासन के महत्व को बालकों के सामने प्रदर्शित करे l समुचित अनुशासनप्रिय शिक्षकों क प्रबंध हो l शिक्षा का महत्व सबंध विद्दार्थी के जीवन लक्ष्य से जोड़ा जाए l विद्दार्थी को अनुशासित वातावरण प्रदान किया जाए l शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति का कोई व्यवधान न हो तो विद्दार्थियों में उचित एवं आवश्यक अनुशासन की स्थापना की जा सके तथा यह उनकी प्रथम पाठशाला हो l




पर्यावरण प्रदुषण

रुपरेखा -

प्रस्तावना :-
प्रदूष्ण के प्रकर एवं करण :-
प्रदुषण की समस्याओ का समाधान :-
निष्कर्ष :- 

प्रस्तावना :- विज्ञानं ने अपने अनुपम उपहारों से मानव जीवन की कायाकल्प क्र दी है, किन्तु इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि विज्ञान ने ही प्रदुषण जैसी भयंकर समस्या को भी जन्म दिया है l प्रदुषण का अर्थ है वातावरण में किसी तत्व का असंतुलित मात्रा में विद्द्यमान होना l प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है दोष उत्पन्न होना l आज मानव ने स्वयं में समस्या उत्पन्न की है l प्राक्रतिक स्रोतों का बड़े पैमाने में विनाश करने से ये दोष उत्पन्न होते है l ये ही प्रदुषण हमारी शारीरिक, मानसिक स्थिति में विकृतियाँ उत्पन्न क्र रहे है l प्रदुषण रोगों का निमंत्रण है, प्राणियों को अकाल मृत्यु का संकेत है l 

प्रदूष्ण के प्रकर एवं करण :- प्राक्रतिक संतुलन में दोष उत्पन्न होना ही प्रदुषण है l प्र्दुष्ण अनेक प्रकार के होते है, लेकिन प्रमुख रूप से तीन प्रकार के होते है –

1. वायु प्रदुषण
2. जल प्रदुषण
3. ध्वनि प्र्दुष्ण 

1. वायु प्रदुषण :- कल कारखानों का धुआ, मोटर एवं अन्य वाहनों का धुंआ इस कदर चारो ओर फैल रहा है कि स्वच्छ वायु में श्वास लेना भी दुर्लभ हो गया है l ये प्रदूषित वायु के कण श्वास नलियों से गुजरते हुए हमारे फेफड़ो में जाकर रोग फैलता है l    

2. जल प्रदुषण :- कल कारखानों का दूषित जल नदी, नालों मे मिलकर भयंकर जल प्रदुषण पैदा करता है, और अनेक बीमारियों को जन्म दे रहे है l 

3. ध्वनि प्र्दुष्ण :- ध्वनि प्रदुषण मनुष्य के रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए परन्तु आज कल कारखानों का शोर, मोटर गाडियों लाऊडस्पीकरों, के कर्ण भेदक ध्वनियों ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है l 

प्रदुषण की समस्याओ का समाधान :- समस्याओ के कारणों पर दृष्टीपात करने के उपरांत प्रदुषण की रोगथाम कैसे की जाए इस पर विचार क्र लेना आवश्यक है प्रदुषण की समस्या के लिए रोकथाम निम्न तरीको से किया जा सकता है –

  1. अधिकाधिक पेड़ लगाकर l
  2. सड़कोके दोनों किनारे घने पेड़ हो l 
  3. सामाजिक प्रदुषण को दूर करने के लिए शिक्षा से उत्तम संस्कार दिए जाए l
  4. कल कारखानों को शहर से दूर स्थापित किया जाए 
  5. क्ल कारखानों की चिमनियों को ऊँचा रखा जाए l
  6. वण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए l
  7. कारखानों के दूषित जल नदी, नालों में प्रवाहित न किया जाए l 
  8. यातायात के साधनों से निकलने वाले धुंए को यंत्र लगाकर नियंत्रित किया जाए l 
  9. आण्विक शास्त्रों का परिक्षण बिल्कुल बंद कर दिया जाए l 
  10. मानव स्वंम अपने परिवेशों को साफ-सुथरा रखने हेतु प्रयत्नशील रहे l  

निष्कर्ष :- यह की विज्ञान ने यदि समस्याएँ दी है तो उसका समाधान भी दिया है l अतः हमारा कर्तव्य  है की हम सावधानीपूर्वक उन समाधानकारक उपायों का उपयोग करे l यदि इस और गम्भीरता पूर्वक विचार न किया गया तो भविष्य में यह और विक्राल रूप धारण क्र लेगी l 

अतः आइये हम सब मिलकर इस समस्या को नियंत्रित करने का प्रयास करे तो मानव जीवन सुखद और खुशहाल होगा l 




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