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, Networks and Internet इन हिंदी


Communication , Networks and Internet
(संचार , नेटवर्क एवं इन्टरनेट)

परिचय ( Introduction )
कम्युटरसूचनाओं का जनक है , किन्तु ये सूचनाएँ मानव के लिये तब तक उपयोगी नहीं हो सकती जब तक कि इन सूचनाओं का आदान - प्रदान हो यदि हम पिछली शताब्दियों को देखें तो आज की अपेक्षा पहले सूचनाओं या संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने में समय लगता था किन्तु वर्तमान सचनाओं या संदेशों का आदान - प्रदान बहुत ही आसान हो गया है और समय भी कम लगता है सैटेलाइट , कम्प्युटर टेलीविजन ने तो सारी दुनिया को एक नगर में बदल दिया है

कम्यूनिकेशन तथा सूचना प्रौद्यागिकी के उपयोग Tice of Communication and Information Technology ) |
कम्यूनिकशन क्यों आवश्यक है ? इसकी उपयोगिता क्या है ? इसके फायदे क्या हैं ? इस तरह के कई प्रश्न हमारे दिमाग में आते हैं या फिर हमसे पूछे हैं आइये हम इस खण्ड में जानते है कि कम्यूनिकेशन तथा सूचना प्रौद्योगिकी क्या है ? इनके उपयोग क्या हैं ? ( What do communication and information technology mean ? What are their uses ? ) कम्यूनिकेशन का अर्थात संवाद होता है इसे संदेशों के आदान - प्रदान के रूप में भी समझा जा सकता है हमारे पास कम्यनिकेशन के सबसे प्रबल माध्यम में हमारी आवाज और भाषा है और इसके वाहक के रुप में पत्र टेलीफोन फैक्स , टेलिग्राम इण्टरनेट इत्यादि है कम्यूनिकेशन का उददेश्य संदेशों तथा विचारों का आदान - प्रदान है संपूर्ण मानव सभ्यता इसी कम्युनिकेशन पर आधारित है तथा इस कम्यूनिकेशन को तेज तथा सहज बनाने के लिए ही सूचना प्रौद्योगिकी का जन्म हआ कम्प्युटर , मोबाइल , इण्टरनेट सबका आविष्कार इसी कम्युनिकेशन के लिए हुआ
उपरोक्तमें इण्टरनेट एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा हम पूरी दुनिया में कहीं भी किसी भी समय , कम से कम समय कम से कम खर्च में सूचनाओं विचारों का आदान - प्रदान कर सकते हैं
आज के समय में दुनिया भर में बड़े - बड़े कारखाने , संस्थान कार्यालय खुल रहे हैं इन कारखानों कार्यालयों में विभिन्न विभाग होते हैं और सभी विभाग एक - दूसरे पर निर्भर रहते हैं सभी विभाग कम्प्यूटरों के माध्यम से सुसज्जित होते हैं ताकि कार्य शीघ्र सम्पादित किया जा सके किन्तु एक विभाग की सूचनाएं दूसरे विभाग को भेजने में काफी समय लगता है उदाहरण के लिये , किसी कारखाने में यदि क्रय - विभाग , स्टोर - विभाग , एकाउन्ट - विभाग हैं तो एकाउन्ट - विभाग को क्रय विभाग विक्रय से सम्बन्धित जानकारी का होना आवश्यक है जबकि विक्रय विभाग को स्टोर से संबंधित जानकारी होनी चाहिए यहाँ पर एक विभाग को दूसरे विभाग की जानकारी जितनी जल्दी मिलेगी कार्य उतने ही शीघ्र सम्पन्न हो सकते है इसलिये यह आवश्यक है कि सूचनाओं को शीघ से शीघ्र एक स्थान से दूसरे स्थान पर कम से कम समय में पहुंचाया जाये

Communication Process संचार प्रक्रिया :
कम्यूनिकेशन का मुख्य उद्देश्य डाटा सूचनाओं का आदान - प्रदान करना होता है डाटा कम्यनिकेशन से तात्पर्य दो विभिन्न या समान डिवाइसों के मध्य डाटा का आदान - प्रदान से है डाटा कम्यूनिकेशन के प्रभाव को तीन मुख्य विशेषताओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है
    1. डिलीवरी ( Delivery ) : डिलीवरी से तात्पर्य डाटा को एक जगह से दूसरे जगह प्राप्त कराने से ददेश्य डाटा डिवाइसों के मध्या जा सका
    2. शुद्धता ( Accuracy ) : - यह गुण डाटा की गुणवत्ता या डाटा के सही होने को दर्शाता है
    3. समयबद्धता ( Timeline ) : - यह गुण डाटा के निश्चित समय में डिलीवर होने को दर्शाता है
किसी कम्युनिकेशन प्रोसेस में पोंच घटक जुडे होते हैं
1 . संदेश ( Massage ) Communication Process
2 प्रेषक ( Sender )
3 . माध्यम ( Medium )
4 . प्राप्तकर्ता ( Receiver )
5 . प्रोटोकॉल ( Protocol )

Communication Types :

सिम्पलेक्स , अर्ध ड्युपलेक्स और पूर्ण डयुपलेक्स ( Simplex , Hall Duplex and Full Duplex )
जिस प्रकार सड़क पर मार्ग वन वे टूव हाता सड़क पर मार्ग वन वे वे होता है ठीक उसी प्रकार कम्युनिकेशन चैनल के मोड होते हैं कम्युनिकेशन चैनल प्रायः सिम्पलेक्स , अद्ध ड्युपलेक्स आर पू आइये यहाँ जानते हैं कि कम्युनिकेशन चनल वाम जागत हक कम्युनिकेशन चैनल के विभिन्न मोड क्या है ? ( What are different modes of communication channel ? )
संचार माध्यम को डाटा प्रेषण की दिशा के अधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है डाटा का सवहन एक बार में एक ही दिशा में है अथवा दोनों दिशाओं में हाता , इस अचार सपलक्स , अद्ध - ड्युपलेक्स और पूर्ण डयपलेक्स में वर्गीकृत किया जा सकता है पल प्रायः सिम्पलेक्स , अर्द्ध डयपलेक्स और पूर्ण ड्युपलेक्स का प्रयोग करते हैं

सिम्पलेक्स ( Simplex )
समरण का इस अवस्था में डाटा या संकेत सदैव एक ही दिशा में प्रेषित होत है उदाहरणार्थ , कम्प्युटर से सयोजित की - बोर्ड के द्वारा डाटा केवल की - बोर्ड से कम्प्यूटर की ओर प्रेषित होता है इसलिए जादा - मागा ( Two - wav ) संचरण के लिए इस प्रकार की दो लाइनों की आवश्यकता होता हा यद्यपि सिम्पलेक्स लाइन सस्ती होती है , लेकिन यह कम्प्यूटर आधारित संचार में अनुपयुक्त होती है कम्प्युटर - आधारित संचार में द्वि - मागी संचरण की आवश्यकता अधिक होती है यहाँ तक कि प्रिंटर जैसी डिवाइसेज में भी जिनमें डाटा प्रायः एक ही दिशा में संचरित होता है , यह अनुपयुक्त रहती है



Simple method of data transfer
अर्द्ध ड्युपलेक्स ( Hair Duplex )
इस व्यवस्था में सचरण तो दोनों दिशाओं में सभव है लेकिन एक समय में एक ही दिशा में सचरण होला है सचरण की यह अवस्था वकाल्पक हि - मागी ( Two - way alternative ) भी कहलाती है उदाहरणार्थ एक हार्ड डिस्क से डाटा का आदान - प्रदान अर्थ - ड्युपलेक्स अवस्था में होता है जब हार्डडिस्क पर डाटा संग्रहित किया जाता है तो उस समय डाटा को हार्डडिस्क से पढ़ा नहीं जा सकता है और जब डाटा हार्डडिस्क से पढ़ा जा रहा हो तो संग्रहित नहीं किया जा सकता है |




पूर्ण ड्युपलेक्स ( Full Duplex )

इस अवस्था में एक समय में डाटा का सचरण दोनों दिशाओं में टेलीफोन लाईनो में यह सुविधा होती है कम्प्युटर कम्प्यूटर के हार्डवेयर का उपयोग होता है इस अवस्था के संचरण में वहद मात्रा में दिशाओं में होता है डाटा का सचरण दोनों दिशाओं में संभव है विशेष उददेश्य की रानी है कम्प्यूटर से कम्प्युटर के हार्डवेयर संचार में पूर्ण डयपलेक्स अवस्था अवस्था के संचरण मे वृहद मात्रा में डाटा का संचरण एक ही समय में दोनोंदिशाओ में होता है l




Communication Protocol ( कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल )
प्रोटोकॉल नियमों का समूह होता है , जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जोड़ने एवं उनके बीच में सूचना के आदान प्रदान के लिए बनाया गया है प्रोटोकॉल नेटवर्क से जड़े डिवाइस के बीच में डाटा का स्थान्तरण नियत्रित करता है , यदि समस्या आती है तब error मेसेज दर्शाता है साथ ही स्थान्तरण की प्रक्रिया के अनुसार डाटा को सभालता है एक डिवाइस से डाटा कैसे जाना चाहिए तथा दूसरे डिवाइस को डाटा कैसे प्राप्त करना है . यह प्रोटोकॉल निश्चित करता है
जैसेProgramming Language को लिखते हैं तब हम कुछ Rules को Follow करके प्रोग्राम लिखते है . जिस प्रोग्राम को computer अच्छी तरह से compile कर सके , वैसे ही अगर हम दूसरा उदाहरण ले तो हम जब आपस में बात चित करते हैं तब भी हम rammar वगेरा को ध्यान में रख के वाक्य को बोलते हैं . अगर हम बिना Grammar के कुछ लिखेंगे तो पढ़ने वाले को कुछ भी समझ नहीं आएगा
internet में अगर कोई भी Information ( Text , Image , Audio , Video ) को भेजा जाता है तो sender तरह से और Receiver computer दोनों ही उस Information और data को user के computer पे अच्छी Tormat करके Display करवाने के लिए Protocol का इस्तमाल किया जाता है

Types of Protocols
1 . Transmission control Protocol ( TCP )
2 . Internet Protocol ( IP )
3 . Internet Address Protocol ( IP Address )
4 . Post office Protocol ( POP )
5 . Simple mail transport Protocol ( SMTP )
6 . File Transfer Protocol ( FTP ) ,
7 . Hyper Text Transfer Protocol ( HTTP )
 8 . Ethernet
9 . Telnet
10 . Gopher

Works or Protocol ( प्रोटोकॉल के कार्य )
प्रोटोकॉल कई प्रकार के होते हैं और इसी कारण इनके कार्य भी अलग - अलग होते हैं
1 . Information केTransformation तथा उसके प्रवाह को नियंत्रित करने के लिये Control Protocol का Use किया जाता है
2 Protocol internet के माध्यम से होने वाले communication से सम्बन्धित information को रखने का कार्य करता है
3 . प्रोटोकॉल एक बड़े संन्देश को छोटे Blocks में तथा Blocks को सुनिश्चित आकार के Fackets में और उन Packets को data frame में विभाजित करने में मदद करता है
4 . प्रोटोकॉल Nerwork तथा आंकड़ों के संचार में किसी भी प्रकार की error या व्यवधान को जात कर उनका निवारण करता है
5 . प्रोटोकॉल आंकड़ों की सुरक्षा तथा गोपनीयता बनाये रखता है तथा इनकी डाटा कोडिग ( Encryption ) , डाटा डिकोडिंग ( Decryption ) तथा Compression technique प्रयुक्त की जाती हैं



Communication Channels / Media संचार माध्यम :
या मीडिया उस वस्तु को कहा जाता है जो सचना को स्त्रोत से गंतव्य तक ले जा सकता हो सचार माध्यम मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकत किये गये है :-
1 . भौतिक संयोजन अथवा तारयुक्त माध्यम ( Physical line or wired
2 . बेतार अथवा माइकोवेव माध्यम ( Wireless of Microwave Media )

1 . भौतिक संयोजन अथवा तारयुक्त माध्यम ( Physical line or wired mean ):-
सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में धात्विक तार अथवा फाइबर आप्टिक तार का प्रयोग किया जाता है धात्विक तार जैसे तांबे के तार में द्यत धारा के रुप में संकेतों का प्राप्त तथा ट्रासपाट है आप्टिकल फाइबर तार प्रकाश के रुप में संकेतों को प्राप्त तथा ट्रांसपोर्ट करता है तारयुक्त माध्याम तीन प्रकार के होते हैं

) ट्वीस्टेड युग्म तार ( Twisted Pair Cable ) :  यह सस्ता संचार माध्यम है यह परस्पर लिपटे तारों का युग्म पियर ) होता है जिसमें दोनों तार भा पतले तारों के रेशो से बने होते है संचार माध्यम का यह तकनीक बहत पहले से उपयोग किया जा रहा है इस माध्यम का उपयोग टेलीफोन लाईन में अधिक किया जाता है कम्प्युटर से टेलीफोन लाइन का संयोजन करने के लिए मोडेम में इसी तार को संयोजित किया जाता है Copper mesh shiela

) कोएक्सियल तार ( Coaxial Cable ) :  ट्वीस्टेड युग्म तार की तरह ही कोएक्सल तार सूचना प्रसारण का एक तारयक्त माध्यम है कोएक्सिल लार टवीस्टेड यम्म तार के मुकाबले ऊँची आवृत्ति के सिग्नल को भेजने के लिए इस्तेमाल किये जाते है दो तारों के बजाय कोएक्सिल केबल में एक तास या स्टडड तार का केन्द्रीय चालक होता है जो मख्यत ताबका बना होता है और विद्युत राधक आवरण मढका रहता है जो फिर धात के वकीला दोनों ही बाहरी चालक में ढका होता है बाहर में धातु के तार लपेटे जाने से केबल की बाहरी शोर से बचाता है साथ ही दूसरे कंडक्टर का भी कार्य करता है जो सर्किट को पूरा करता है यह बाहरी conducting कंडक्टर भी विधुतरोधक आवरण से ढका रहता है तथा पुरा तार Copper wire प्लॉस्टिक से ढका रहता है इसका प्रयोग ऐसे संवेदनशील संचरण insulation में किया जाता है जिसमें व्यवधान से संचार अधिक प्रभावित हा outer सकता है जैसे टेलीविजन के लिए केबल कनेक्शन में इसी का Bedim Master प्रयोग किया जाता है

) फाइबर ऑप्टिक केबल ( Fiber Optic Cable ) : फाइबर ऑप्टिक केवल सचार माध्यम की एक आधनिक सकती केरल सचार माध्यम की एक आधुनिक तकनीक है यह केबल काँच के हजारों पतले रेशो से निर्मित होती है जिनमें प्रकाश का सबहन हा सकता है इसमें के समान बारिकाना इसमें सचरण कालए डाटा का प्रकाश - पज के इस प्रकाश - पन्ज को एक लेजर डिवाइसद्वारा कराडो बिट्स प्रति से है प्रत्येक रेशा एक फाइबर कहलाता है बाल के समान केवल एक का कहलाता है बाल के समान केवल एक फाइबर कुछ टेलीविजन के संकेत अथवा हजारों टेलीफोन लाइनों के संकेत सचारित कर सकता हूँ फास भार कोणक्सल का अपेक्षा कम होता है यह प्रयाग मसुगत हालाहा कम होता है यह प्रयोग में सुगत होता है दो कोएक्सिल केवलों को परस्पर संयोजित करने पर उनके जोड़ पर संचरण बाधित होता है जबकि दो फाइबर पता ही नहीं चलता है अर्थात संयोजन करने के बाद ये एक हो insulation प्रकाश का सवहन हो सकता है इसमें प्रत्येक कॉच का रेशा एक बाल के लिए डाटा को प्रकाश - पुज में परिणत किया जाता है और डाटा इस द्वारा करोडो बिट्स प्रति सेकण्ड की गति से प्रेषित किया जाता सकेत संचारित कर सकता है फाइबर ऑप्टिक केबिल का आकार और चिरण बाधित होता है जबकि दो फाइबर ऑप्टिक केबिलों के जोड़ का करने के बाद ये एक हो जाती है क्योंकि उन्हें चिपकाया जाता है
इनमें डाटा प्रेषण की क्षमता कोएक्सिल केबिल की क्षमता से लगभग 10 गुना अधिक होती है । कोएक्सिलको बिल का भार फाइबर केबल से लगभग 20 गुना अधिक होता है । फाइबर ऑप्टिक केबिल में डाटा का संचरण प्रकाश - पुन्ज की अवस्था में होता है जिससे वैद्युत व्यवधान का दुष्प्रभाव नहीं होता है । अत डाटा संचरण की बिट त्रुटि शून्य होती है । डाटा के विद्युत चुम्बकीय संचरण में त्रुटि अधिक होती है और संचार शुद्ध नहीं होता है ।

2. बेतार अथवा माइकोवेव माध्यम ( Wireless of Microwave Media )
ये मीडिया इलेक्ट्रोमेग्नेटिक या विद्यत चंबकीय तरंगों को किसी भौतिक माध्यम के बगैर ही ट्रासपोर्ट करते हैं । सिग्नल सामान्यतः मुक्त स्थान के द्वारा प्रसारित किये जाते हैं और इस प्रकार हर किसी को उपलब्ध होता है , जिसके पास उन्हें प्राप्त करने की क्षमता वाले डिवाइस उपलब्ध है ।
बेतार सिग्नल कई तरीके से उदगम से गंतव्य तक गमन कर सकते है । ये तरीके भूमि प्रसार , आकाश प्रसार , तथा दृष्टि रेखा प्रसार हैं । भूमि प्रसार में रेडियों तरंग जमीन को छूते हुए वातावरण के सबसे नीचले भाग में गमन करते हैं । ये कम आवृत्ति वाले सिग्नल प्रसारण एन्टिना से सभी दिशाओं में फैलते हैं तथा ग्रह के वक्र का अनुसरण करते हैं । दूरी सिग्नल की शक्ति मात्रा पर निर्भर करती है । जितना अधिक शक्ति होगी उतना अधिक दूरी होगा । आकाश प्रसार में उच्च आवृत्ति वाले रेडियो तरंग आयन मंडल में ऊपर की ओर विचरण करती है जहाँ से वे फिर पृथ्वी को वापस लौटा दिये जाते हैं । इस प्रकार के प्रसारण कम आउटपुट शक्ति के साथ बड़ी दूरी की अनुमति देते हैं ।
दृष्टि रेखा प्रसार में उच्च आवृत्ति वाले सिग्नल एक एन्टिना से दूसरे एन्टिना तक सीधी रेखाओं में प्रसारित किये जाते हैं । एन्टिना एक दिशा में एक दूसरे के आमने - सामने तथा या तो इतने ऊँचे या इतने करीब हो कि पृथ्वी का वक्र उन्हें प्रभावित न कर पाये । दृष्टि रेखा प्रसार जटिल होता है क्योंकि रेडियों प्रसारण पूरी तरह से फोकस नहीं किया जा सकता है । रेडियो तरंग माइक्रोवेव तथा इन्फारेड बेतार प्रसारण मीडिया है ।

अ) रेडियो तरंग ( Radio Waves ) : रेडियो तरंग लगभग सभी दिशाओं में विचरते हैं । जय एन्टिना रेडियो तरंगों को प्रसारित करती है वे सभी दिशाओं में प्रसारित होते हैं इसका अर्थात यह है कि सिग्नल भेजने वाले तथा सिग्नल प्राप्त करने वाले एन्टिना को एक सीध में कतारबद्ध होने की आवश्यकता होती है । कम एवं मध्यम आवृत्ति वाले रेडियो तरंग दिवारों को भेद सकते हैं ।

ब) माइक्रोवेव ( Microwaves ) : उच्च आवृत्ति वाले विद्युत चुम्बकीय तरंग माइक्रोवेव कहे जाते हैं । माइक्रोवेव एक ही दिशा में विचरने वाले तरंग होते हैं । जब कोई एन्टिना माइक्रोवेव तरंगों को प्रसारित करता है तो बहत सीमित फोकस किये जा सकते हैं । इसका अर्थ यह है कि सिग्नल भेजने वाला तथा प्राप्तकर्ता एन्टिना को एक सीध में कतारबद्ध किये जाने की आवश्यकता होती है । एक ही दिशा में विचरने वाला इसका यह गण एक स्पष्ट लाभ है । एन्टिना के एक जोडे को एन्टिना के दूसरे जोडे द्वारा गगैर हस्तक्षेप किये एक सीध में कतारबद्ध किया जा सकता है । ( स ) इति वाली इफ्रारेड तर मर के कम रेन्ज का कम्पप्रयोग करते समय अपने          

स) इन्फारेड ( Infrared ) : इंफारेड तरंग का प्रयोग छोटे क्षेत्र के कम्यूनिकेशन में किया जा सकता है । अधिक आवृत्ति वाली इंफ्रारेड तरंग भी दिवारों को भेद नहीं सकती है । यह लाभकारी लक्षण एक दूसरे के बीच हस्तक्षेप को रोकता है । एक कमरे के कम रेन्ज का कम्यूनिकेशन सिस्टम अगले कमरे के दूसरे सिस्टम द्वारा प्रभावित नहीं होता । हम अपने इंफ्रारेड रिमोट कंट्रोल का प्रयोग करते समय अपने पड़ोसियों के द्वारा रिमाट के प्रयोग को बाधित नहीं करते हैं ।

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